Wednesday, 22 December 2010
I read ..
I read ..
- If you are right – no need to get angry .. if you are wrong – you have no right to get angry .. ( my friend DR SARBHAI had sent me this message on 21 Dec 2010 .. in the morning )
प्याज .. आज की तारीख में ..
Friday, 3 December 2010
कविताएं .. पुरानी .. बहुत पुरानी ..
कुत्ते को
सिखातो हो
अच्छा करते हो
कुत्ता तो कुत्ता है
शेर
कभी नहीं
हो सकता
क्या
यह भी
याद रखते हो ..
(2)
अपेक्षा किसी से
अपेक्षा एक दूसरे से
सौदा पूर्वाग्रह से
अपेक्षा न किसी से
न ही एक दूसरे से
दोस्ती पूर्वाग्रह से
(3)
कुछ देखा तो था ..
लेकिन
यह क्या
वह तो बदल गया ..
फिर से ..
अब
फिर से बदल गया ..
सभी तो नहीं
लेकिन
फिर भी
तेजी से बदल गया ..
शरीर तो नहीं
सिर्फ
रंग तेजी से
बदलता
चला गया ..
वह
गिरगिट
था ..
किसी को
देखकर
उसकी याद
आ गई ..
Friday, 26 November 2010
कहीं पढ़ा था ..
Friday, 6 August 2010
impressive lines ..
- You may give 100 chances to to your enemy, to become your friend .. but never give a single chance to your friend, to become your enemy ..
Create a value of your own / given value is not thr real one .. you have / you will be remembered by your own efforts and not by virtue of a status awarded to you like others ..
- Just hire a driver if you do not know how to drive .. and just burn the sadness in your Heart if you do not know how to remain happy ..
Tuesday, 27 July 2010
कल किसी ने कहा ..
Just by the superficial observation .. one must not form any opinion .. as one may loose the opportunity given by GOD ..
कोई दूसरा भी .. जो वहीं था .. सुन रहा था .. उसने कहा -
एक कहानी सुना था .. बचपन में - रास्ते में पड़े पत्थर से हर कोई टकरा रहा था लेकिन किसी ने भी उस पत्थर को उठाकर किनारे करने का प्रयास नहीं किया .. उस पत्थर के नीचे किसी ने अशर्फियां दबाकर रख दी थी ..
सुनकर .. मैं सोच रहा था ..
Friday, 16 July 2010
POSITIVITY ..
expectations ..
Monday, 3 May 2010
मुझे बहुत दुख हुआ ..
Friday, 9 April 2010
the life ..
Life starts
after birth
at zero
after passing though
the number of events
good or bad
it ends
at zero ..
but
KNOWING THE END
is
ZERO
life is important
between
zero and zero ..
Monday, 8 March 2010
चिंतन ..
Sunday, 21 February 2010
Monday, 1 February 2010
Thursday, 28 January 2010
28 जनवरी 2010 । गुरूवार ।
ज्योतिष और शास्वत सत्य - अच्छी जिंदगी जीने की चाहत किसे नहीं होती .. और फिर ऐसी ही किसी स्थिति को प्राप्त करने के लिये लोग ज्योतिष का सहारा लेते हैं । यही वजह है कि ज्योतिष एक ऐसा धंधा है जिसे दुनिया की किसी मंदी का कोई असर न तो कभी पड़ा है और न ही कभी पड़ सकता है और यह एक शाश्वत सत्य है .. ।
- जेएसबी
Wednesday, 27 January 2010
27 जनवरी 2010 । बुधवार ।
यह काफी दिन पहले की बात है । किसी शीर्ष ने मुझसे कहा कि उसे अपनी ऊंचांई पर नाज़ है .. और उसने आगे कहा कि उसके इस फख़्र में वह पूरी शिद्दत से पहली सीढ़ी को भी शामिल करता है .. । मैंने सुना और उससे कहा कि उसकी यह सोच उसे इस उंचांई पर लेकर जायेगी जहां से आज या वतर्मान बौना दिखाई देगा । .. और मेरा यकीन मानिये कि मेरी तब की कही हुई वह बात आज हकीकत के रूप में मेरे सामने है । यह तो वक्त की जरूरत है कि मैं उस शीर्ष का उल्लेख नहीं कर सकता लेकिन इस बात से आपको अवगत कराना अपना कर्तव्य समझता हूं .. ।
- जेएसबी
Tuesday, 19 January 2010
19 जनवरी 2010 । मंगलवार ।
भीषम जी, मेरे मित्र विश्वरंजन के बड़े दामाद हैं । वे गुजरात में अहमदाबाद में रहते हैं । उन्होंने मुझे एक SMS भेजा - Do you know that why the cars front glass are so large and the rear view mirror is too small .. ? .. because future is more important than the past .. althoough do not ignore the rear view but look ahead with a broad view .. मैं इसे पढ़कर प्रभावित हुआ । इस message के अनंर्तनिहित भाव ने मुझे इसे ब्लाग में लिखने प्रेरित किया । कहते हैं कि समझदार को इशारा काफी होता है । इसलिये सोचता हूं कि इसके आगे क्या लिखना .. ।
- जेएसबी नायडू ।
Tuesday, 12 January 2010
12 जनवरी 2010 । मंगलवार ।
प्रति वर्ष, डा. अशोक भट्टर के नये साल पर भेजे जाने वाले बधाई संदेश के असामान्य प्रस्तुति का मुझे बेसब्री से, हमेशा इंतजार रहता है । नये वर्ष के बधाई संदेश के साथ-साथ किसी न किसी thoughtful message का विवरण उनके बधाई संदेश में पढ़ने को मिलता ही है । उनके इस thoughtful attempt से मैं सदैव ही प्रभावित रहा हूं । पेशे से शिशु रोग चिकित्सक होने के साथ-साथ .. उनके ट्यूबुलर विज़न से परे होकर स्थापित इस सोच का .. मैं सम्मान करता हूं ।
- डा. जेएसबी नायडू
Sunday, 10 January 2010
10 जनवरी 2010 । रविवार।
मेरे एक मित्र हैं, जो नाक-कान-गला विशेषज्ञ हैं .. । यह उस दिन का वाक्या है जब हमारी मुलाकात किसी के गृह-प्रवेश कार्यक्रम में हुई थी .. । कुछ लोगों के साथ वे भी खड़े-खड़े बतिया रहे थे । वे बातों ही बातों में किसी से कह रहे थे - " अब आपको उम्र के इस पड़ाव पर तो आकर सोचना चाहिये .. आप इतना क्यों बोलते हैं .. माना कि ईश्वर ने आपको नाक भी दिया व कान भी और गला या आवाज भी .. दिया है लेकिन आपको बोवना कम से कम चाहिये .. सारी तकलीफों की जड़ तो यही है .. आप सुना ज्यादा करिये और बोला तो बिल्कुल भी कम "शारीरिक इलाज करते-करते आप तो बड़ी सार-गर्भित बातें कह गये हैं .. वहीं खड़े किसी व्यक्ति का कमेंट था । पास में खड़े किसी दूसरे सज्जन ने कहा - डा. साहब आप बिल्कुल ठीक कहते हैं .. आपकी ये बातें .. बीते हुए कल व आज के साथ-साथ आने वाले कल के संदर्भ में भी सत्य व सामयिक प्रतीत होती है । अगले दिन सुबह-सुबह अखबार हाथ में लेते ही मित्र की कही हुई वह बात याद आ गई .. ।
सोचा आपको भी बताता चलूं .. ।
- डा. जेएसबी नायडू ।
Friday, 8 January 2010

08 जनवरी 2010 । शुक्रवार ।
मैंने सोचा था कि मेरे ब्लाग पर प्रतिक्रिया व्यक्त किये सभी को अलग- अलग अभिव्यक्त करूंगा लेकिन शायद इसे मेरी अपरिपक्वता कहूं या जो कुछ भी .. जैसा भी आप समझें .. कि मैं ब्लाग की इस दुनिया में नया-नया हूं इसलिये संबंधित तकनिकी जानकारी का अभाव है अतः मैं सभी से क्षमा मांगता हूं कि चाहकर भी उन्हें मैं उनके ब्लाग में जाकर सही ढंग से टिप्पणी नहीं कर पा रहा .. और इसलिये सभी के लिये संयुक्त रूप से मैंने लिखा है -मेरे ब्लाग पर आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर अच्छा लगा .. । भविष्य में भी ऐसा ही मार्ग-दर्शन व सहयोग आपसे प्राप्त होता रहेगा ऐसी आशा करता हूं । नये वर्ष की ढेर सी शुभ-कामनाएं .. ।
सादर ..
- डा. जेएसबी नायडू ।
Thursday, 7 January 2010
भाग्य ज्योतिष के पास नहीं मिलता ..
आपके किये गये कर्म आपके भाग्य के निर्माता हैं, कुंडली नहीं । सबसे महत्वपूर्ण है तो उपरी माले में स्थित आपका दिमाग । आपकी सोच .. आपका निर्णय .. आपके तकदीर की दिशा तय करता है । जो व्यक्ति किसी ज्योतिष के पास जाकर अपनी जिंदगी की दिशा तय करते हैं वे शायद यह भूलते हैं कि दम तो पुरूषार्थ में है .. ज्योतिष की कही बातों में नहीं .. क्योंकि दुनिया के सभी बड़े-बड़े .. महान लोग किसी ज्योतिष के मार्गदर्शन से महान नहीं बने हैं बल्कि सही वक्त पर किया किया गया उनका कर्म है जिसने उनको इतिहास में महान रूप में स्थापित किया है । दोष ज्योतिष या फिर ज्योतिष शास्त्र में नहीं है .. बल्कि व्यक्ति की सोच में है और जो आलसी है वह बिना कर्म किये कैसे सफलता प्राप्त कर सकता है । इस सत्य को कैसे कोई नकार सकता है कि परीक्षा में पास होने के लिये परीक्षा में बैठना जरूरी है .. ।
मैं तो कर्म की प्रधानता पर विश्वास करता हूं ..
डा. जेएसबी नायडू
Wednesday, 6 January 2010
आज सुबह मैंने अपने कमरे के बाहर कुछ व्यक्तियों को आपस में बात करते सुना -
एक - अपनी जिंदगी तो जैसी भी है .. यार ठीक है । मैं तो उससे संतुष्ट हूं .. ।
कोई दूसरा - लेकिन जैसे लगता है कि मैं तो कुछ कर ही नहीं पाया हूं .. अपना हाल तो आधे खाली गिलास जैसा है । पहला- यार तुम्हारी तो सोच ही निगेटिव है .. तुम्हारी सोच में नकारत्मकता है । तुम तो आधे खाली गिलास को लेकर डिप्रेशन में हो और मुझे देखो मैं तो सोचता हूं हमेशा सकारात्मक .. एकदम पाजीटिव थिंकींग .. । मुझे फिर किसी तीसरे व्यक्ति की आवाज सुनाई दी .. जिसके सोचने का तरीका एकदम अलग था .. वह कह रहा था - तुम लोग भी क्या निगेटिव और पाजीटिव के चक्कर में हो .. यार, गिलास के आधे खाली का यह क्या मतलब निकाल रहे हो कि .. ऐसी सोच नकारात्मक है .. कतई नहीं इस स्थिति को सकारात्मकता में लेना चाहिये .. गिलास के आधे खाली हिस्से को हमें भरना है .. पाजीटिव सोच के ऐसे आयाम को जगह दो .. न कि आधे खाली गिलास का रोना रोओ .. ।
उनके वातार्लाप को सुनकर मुझे लगा कि ब्लाग में इस बात को जरूर लिखना चाहिये ..
- डा. जेएसबी नायडू
Tuesday, 5 January 2010

title - a thought inside the land scape
size - 17 inch x 29 inch
media - oil
painting by dr jsb naidu
05 जनवरी 2010 । मंगलवार । किसी भी हल्की सोच को प्रश्रय देने का परिणाम शायद पानी में तैरते उस पत्ते की तरह है जिसकी प्रकृति हल्की होने के कारण वह पानी के उपर तैरता रहता है और किसी को भी आसानी से दिख जाता है .. फिर एक समय ऐसा प्रारंभ होता है कि जब वह सढ़ना शुरू होता है । यह वह स्थिति है जब वह पानी को दूषित कर देता है । इसके ठीक विपरीत किसी भारी चीज की होती है .. जिसकी फितरत होती है गहराई में डूब जाना .. । प्रकृति के ऐसे कई उदाहरण हैं जिनको हम शायद अनदेखा कर जाते हैं लेकिन वे प्रेरणादायक व मार्गदर्शक हो सकते हैं । दरअसल मुफ्त में उपलब्ध इन स्थितियों को हम ध्यान नहीं दे पाते हैं और इसकी वजह शायद प्रीआकूपाइड माइन्ड या फिर और कोई भी कारण हो सकता है .. जो आप जैसे विद्वान समझ सकते हैं .. । - डा. जेएसबी नायडू
किसी भी हल्की सोच को प्रश्रय देने का परिणाम शायद पानी में तैरते उस पत्ते की तरह है जिसकी प्रकृति हल्की होने के कारण वह पानी के उपर तैरता रहता है और किसी को भी आसानी से दिख जाता है .. फिर एक समय ऐसा प्रारंभ होता है कि जब वह सढ़ना शुरू होता है । यह वह स्थिति है जब वह पानी को दूषित कर देता है । इसके ठीक विपरीत किसी भारी चीज की होती है .. जिसकी फितरत होती है गहराई में डूब जाना .. । प्रकृति के ऐसे कई उदाहरण हैं जिनको हम शायद अनदेखा कर जाते हैं लेकिन वे प्रेरणादायक व मार्गदर्शक हो सकते हैं । दरअसल मुफ्त में उपलब्ध इन स्थितियों को हम ध्यान नहीं दे पाते हैं और इसकी वजह शायद प्रीआकूपाइड माइन्ड या फिर और कोई भी कारण हो सकता है .. जो आप जैसे विद्वान समझ सकते हैं .. ।
- डा. जेएसबी नायडू
Monday, 4 January 2010
Sunday, 3 January 2010
कुछ युवाओं को मैंने बातें करते हुए सुना - हमें तो वही कैरियर चुनना चाहिये जो हमको पसंद हो । जबकि मेरे माता-पिता सख्त खिलाफ हैं इस बात के लिये कि मैं उनकी बात नहीं मानकर जिद लिये बैठा हूं कि मैं तो अपना कैरियर किसी और ही फिल्ड में बनाना चाहता हूं । मैंने तो अपने डैड से कहा कि आप अपने अनुभव से सोचते हैं जिसमें आपकी परिस्थितियां शामिल रही होंगी । फिर मैंने उनको एक अखबार पढ़ाया जिसमें किसी कामयाब व्यक्ति की कही हुई बात लिखी थी कि मैं आज कामयाबी के उंचे धरातल पर हूं जबकि मेरे पिता ने मेरे स्कूल के दिनों में ही इस फिल्ड में जाने के लिये मना किया था और नाराजगी जताई थी । लेकिन पिता के विरोध के बावजूद मैंने ऐसा किया और देखो अब मैं कितना सफल हूं ।
मैं सोच रहा था कि इक्के-दुक्के उदाहरण को लेकर कोई अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश अवश्य कर सकता हैं । लेकिन शायद यह समझना भी जरूरी है कि हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा कामयाब बनें और उसकी जिंदगी में कम से कम प्रतिरोध आये इसलिये उनकी इस भावना को बिना सोचे-समझे अपमानजनक ढंग से ठुकराकर गैरवाजिब, अप्रासंगिक व बेसिरपैर का कहना बुद्धिमानी नहीं है । आप किसी रास्ते से जाकर कोई आरामदायक स्थिति को प्राप्त कर और फिर अपने शौक को पूरा कर सकते हैं । फिल्मों में प्रसिद्ध चिकित्सक व खेल के क्षेत्र में सफलता हासिल करने वालों को नहीं भूलना चाहिये कि किसी प्रतिष्ठा को प्राप्त करने के बाद अपने मनचाहे कैरियर में जाकर उन्होने कामयाबी हासिल की ।
मैंने इसी विषय पर किसी उम्र दराज से बात किया तो उनका कहना था - किसी मंजिल को प्राप्त करने के बाद फिर यदि कोई अपने शौक पर जा टिकता है और वहीं कामयाबी के नये आयाम स्थापित करता है तो यह शायद ज्यादा अक्लमंदी की बात होगी ।
सोच के इस आयाम को भी तो नकारा नहीं जा सकता .. ।
Saturday, 2 January 2010
आज कोई लेख लिखते हुए मुझे यूं ही याद आ गया कि किसी ने कभी मुझसे पूछा था कि आपको कौन सा रंग पसंद है और फिर मेरे उत्तर की प्रतिक्षा किये बगैर ही मुझे अवगत कराया गया कि उन्हें तो लाल रंग पसंद है लेकिन नीला रंग नहीं । दृढ़ता किसी भी स्तर पर ठीक नहीं है । दृढ़ता शरीर की बढ़ी हुई उम्र में होती है लेकिन बचपन तो लचीलापन लिये हुए होता है । प्रकृति में लाल रंग के फूल भी हैं और पेड़ों का रंग हरा है व वहीं आकाश का नीलापन भी अपना अस्तित्व बनाए हुए है । प्रकृति के इन संकेतो को नजरअंदाज करना शायद बुद्धिमानी नहीं है ।
Friday, 1 January 2010
01 जनवरी 2009, शुक्रवार ।
- मैं फिल्में तो देखता हूं .. लेकिन बहुत ज्यादा नहीं लेकिन अब इन दिनों कुछ ज्यादा ही फिल्में देखने लगा हूं और तकरीबन 6 फिल्में तो मैंने पिछले साल .. 2009 में देख ही लिया है । बीते साल के जाते-जाते 3 Idiots व Paa जैसी फिल्में देखकर मुझे लगा कि अच्छी थीम या सोच-विचार को लेकर बनाई गई ऐसी फिल्में शायद आवश्यक हैं .. आज के दौर में ।