LIFE ..
Monday, 3 May 2010
मुझे बहुत दुख हुआ ..
मैंने हिंदी माध्यम में बारहवीं पास, किसी को देखा कि वह चाण्डक, पाटिल या फिर पूजा जैसे हिन्दी के शब्दों को लिखने में असमर्थ है .. शिक्षा के इस स्तर को देखकर, मैं हतप्रभ था । मुझे आश्चर्य भी हुआ और दुख भी बहुत ।
1 comment:
खबरों की दुनियाँ
8 October 2010 at 11:09 pm
स्वाभाविक है ।
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स्वाभाविक है ।
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