Thursday, 15 May 2014

झुकी हुई कमर देखकर .. कौतुहलवश किसी ने कारण पूछा -
तो - कोई जवाब दे रहा था - कि ढूंढता फिर रहा हूं दो गज जमीन म़जार की खा़तिर ..
तो - किसी ने जवाब दिया - कि ढूंढती फिर रही हूं जवानी कहां चली गई ..

Saturday, 6 April 2013

भाव
अभाव
और
स्वभाव
में उलझे लोगों को देखकर
मैं सोच रहा था ..

Monday, 7 May 2012

रोज की तरह
आज भी
सुबह होते ही
लग गया हूं
फिर से
इंसानियत खोजने ..

Saturday, 21 January 2012

सम्मान के बदले में अपमान ..

किसी को भी कमतर आकना ठीक नहीं .. किसी भी विषय पर अपने आप को ही सदैव उचित ठहराना उचित नहीं .. कोई आपका सम्मान करता है तो यह उसकी कोई कमजोरी नहीं हो सकती इसलिये बदले में उसे असम्मान देना .. यह भी उचित नहीं ..
कोई किसी को सम्मान देता है .. फिर उसकी वजह चोहे कोई भी हो तो यह उसका सौभाग्य है लेकिन .. मैंने यह महसूस किया है कि कभी ऐसा भी होता है कि यदि कोई किसी को सम्मान देते हैं और कारण चाहे कोई भी हो तो सम्मान प्राप्त करने वाला सम्मान देने वाले का निरादर करने लगता है और उसे यह गलतफहमी हो जाती है कि केवल वह ही है जो सर्वत्र जानकार है और बाकी सभी मूढ़-मति ।
जिस तरह से गर्मी में स्वेटर असंगति है ठीक उसी तरह कोई किसी ऐसे विषय पर जिसके बारे में उसे खास जानकारी नहीं हैं अपनी राय देते हुए यह कहे कि वह ही सही हैं और वह भी उस व्यक्ति से जो उस विषय पर सिदध-हस्त है .. और फिर रूके भी नही और झल्लाते हुए व लगभग चीखते हुए कहे कि सामने वाला विषय-सिद्ध-हस्त गलत है .. उसे कुछ भी नहीं मालूम .. और ऐसा इसलिये कि उसने टोककर सही स्थिति से अवगत कराने की कोशिश की । इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं – एक तो यह कि वह आइंदा .. अमुक के सम्मान में, नाराज नहीं करने का सोच कर सही स्थिति नहीं बतायेगा .. व दूसरा कि अमुक भविष्य में न केवल वंचित रह जायगा सही जानकारी से बल्कि सम्मान के बदले में प्राप्त अपना अपमान, हो सकता है कि कमजोर होने की स्थिति में अमुक को अकेला छोड़ दे ।
यहां इतना कह देना पर्याप्त नहीं है क्योंकि ऐसी स्थिति .. फिर वजह चाहे कोई भी हो लेकिन स्वस्थ मानसिकता का परिचायक नहीं है .. और अपने वक्त के प्रभाववश उत्पन्न इस स्थिति का कालांतर में कोई सामाजिक दुष्परिणाम हो इतना ही पर्याप्त नहीं है अमुक को अवसाद की स्थिति में भी ले जा सकता है ।

Thursday, 20 October 2011

मैं सोच रहा था ..



अनजान होना
इतने शर्म की बात नहीं ..
मैं सोच रहा था ..
जितना
सीखने के लिए
तैयार
न होना ..

मैं सोच रहा था ..

लेकिन ..
मुझे लिखते समय इस बात का ध्यान जरूर रहता है
कि
जो भी मैं लिखूं उससे, मेरी समझ से, किसी को, कतई नुकसान न हो .. और
फिर जो मैं सोचता हूं उसे लिख देता हूं
इसलिये कि
मैं यह बख़ूबी जानता हूं कि मेरी सोच किसी को रूसवा नहीं कर सकती ..
तो फिर उसे अभिव्यक्त करने में कौन सा मेरा या फिर किसी और का घटता है ..
मैं सोच रहा था ..
मैं चिंतन कर रहा था .. मैं लिख रहा था .. फिर से ..

Wednesday, 5 October 2011

मैं सोच रहा था ..

- आइने का सच वो क्या जाने जो अंधा है .. मैं सोच रहा था ..
- Time splits fast that one may realize one day that the life infact is too short than what was thought earlier .. मैं सोच रहा था ..
- No need to dwell in the past .. not to dream of future .. as both are not in your hands .. but realize the present and just concentrate and enjoy .. मैं सोच रहा था ..
- Never aim too low or too high but just aim at the exact .. never get disappointed or never get overwhelmed with joy .. मैं सोच रहा था ..
- Do you know that what you dream is just possible .. मैं सोच रहा था ..
- Just desire and act for only that .. you find useful .. मैं सोच रहा था ..
- You are recognised by your acts and not by your ideas .. मैं सोच रहा था ..