Monday, 8 March 2010

चिंतन ..

कुछ न कुछ छुपा है .. सभी के अंदर । मेरे अंदर भी है .. मैं कोई दुनिया से अलग थोड़े न हूं .. और मुझे मालूम है कि आपके अंदर भी है .. । छुपी वह बात .. वह खुशी या वह दर्द .. मैं किसी से बांट नहीं सकता .. कभी बांटने का ख्याल आता भी है तो फिर .. डर जाता हूं कि कहीं .. फिसलकर मेरी बात आम न हो जाये । इन बातों का रिश्ता मेरी सांस से बेहद करीब का है । जब तक सांस है .. तब तलक जिंदा है वह बात .. वह जज्बात .. मेरे अन्दर .. फिर, सांस के उखड़ते ही .. फिर वह भी खत्म .. वह कह रहा था । वह कह रहा था .. मैं सोच रहा था ..

Sunday, 21 February 2010

Have a unique character like salt - its precence is not felt when
quantity is right .. but its its absence makes things testless ..

Yesterday I came acress this impressive message ..
I thought to share this with you ..

Monday, 1 February 2010

01 फरवरी 2010 । सोमवार ।

साहबियत पर
बड़े साहब की
लिखी कविता
की
तारीफ कर रहे
किसी
छोटे साहब के टेबल पर
शोभायमान कैंची
को देखकर
छोटे साहब
और
कैंची
की फितरत पर
मैं सोच रहा था ..

- जेएसबी

Thursday, 28 January 2010

28 जनवरी 2010 । गुरूवार ।

ज्योतिष और शास्वत सत्य - अच्छी जिंदगी जीने की चाहत किसे नहीं होती .. और फिर ऐसी ही किसी स्थिति को प्राप्त करने के लिये लोग ज्योतिष का सहारा लेते हैं । यही वजह है कि ज्योतिष एक ऐसा धंधा है जिसे दुनिया की किसी मंदी का कोई असर न तो कभी पड़ा है और न ही कभी पड़ सकता है और यह एक शाश्वत सत्य है .. ।

- जेएसबी

Wednesday, 27 January 2010

27 जनवरी 2010 । बुधवार ।

यह काफी दिन पहले की बात है । किसी शीर्ष ने मुझसे कहा कि उसे अपनी ऊंचांई पर नाज़ है .. और उसने आगे कहा कि उसके इस फख़्र में वह पूरी शिद्दत से पहली सीढ़ी को भी शामिल करता है .. । मैंने सुना और उससे कहा कि उसकी यह सोच उसे इस उंचांई पर लेकर जायेगी जहां से आज या वतर्मान बौना दिखाई देगा । .. और मेरा यकीन मानिये कि मेरी तब की कही हुई वह बात आज हकीकत के रूप में मेरे सामने है । यह तो वक्त की जरूरत है कि मैं उस शीर्ष का उल्लेख नहीं कर सकता लेकिन इस बात से आपको अवगत कराना अपना कर्तव्य समझता हूं .. ।

- जेएसबी

Tuesday, 19 January 2010

19 जनवरी 2010 । मंगलवार ।

भीषम जी, मेरे मित्र विश्वरंजन के बड़े दामाद हैं । वे गुजरात में अहमदाबाद में रहते हैं । उन्होंने मुझे एक SMS भेजा - Do you know that why the cars front glass are so large and the rear view mirror is too small .. ? .. because future is more important than the past .. althoough do not ignore the rear view but look ahead with a broad view .. मैं इसे पढ़कर प्रभावित हुआ । इस message के अनंर्तनिहित भाव ने मुझे इसे ब्लाग में लिखने प्रेरित किया । कहते हैं कि समझदार को इशारा काफी होता है । इसलिये सोचता हूं कि इसके आगे क्या लिखना .. ।

- जेएसबी नायडू ।

Tuesday, 12 January 2010

12 जनवरी 2010 । मंगलवार ।

प्रति वर्ष, डा. अशोक भट्टर के नये साल पर भेजे जाने वाले बधाई संदेश के असामान्य प्रस्तुति का मुझे बेसब्री से, हमेशा इंतजार रहता है । नये वर्ष के बधाई संदेश के साथ-साथ किसी न किसी thoughtful message का विवरण उनके बधाई संदेश में पढ़ने को मिलता ही है । उनके इस thoughtful attempt से मैं सदैव ही प्रभावित रहा हूं । पेशे से शिशु रोग चिकित्सक होने के साथ-साथ .. उनके ट्यूबुलर विज़न से परे होकर स्थापित इस सोच का .. मैं सम्मान करता हूं ।

- डा. जेएसबी नायडू