उस लेख की क्या चर्चा करें .. जो आपको अंदर तक हिला न दे .. हिलाने का मेरा अभिप्राय सकारात्मकता लिये हुए है .. क्योंकि मैं खुद भी नकारात्मकता में विश्वास नहीं करता हूं .. जिस सोच को आपका मन सहेज कर रखना चाहता है ऐसी सोच .. दिल से बाहर आकर शब्दों का रूप ले लेती है .. शब्दों की और अभिव्यक्ति की .. ताकत .. असीमित होती है .. मैं लिख रहा था .. मैं सोच रहा था ..
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